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जीवन का सार

वर्तमान में ही रहना, वह सच्चा अध्यात्म है, ध्यान है, समझ है । यही अपने जीवन का सार है, नहीं तो सत्य को समझने की पूर्व तैयारीयाँ करते रहने से वर्तमान गलत ही खर्च होगा ।

स्वयं की सेवा

दूसरों का उद्धार और सेवा करने के लिए हम प्रयत्न करते हैं उसमें कभी सच्ची मानसिक तृप्ति मिलती नहीं । इनसान पहले खुद की सेवा करे तो स्वरुप को देख सके । नहीं तो जीवन भर दूसरों की सेवा करने के बावजूद अंदर से अति गरीब और भिखारी ही रहेगा ।

संग्रह

संग्रह वही संघर्ष । यह विवेकपूर्वक समझना है । विवेकपूर्वक देखना वह ध्यान और समग्र भाव से देखना वह आचरण । नहीं तो हंमेशा के लिए स्वरुप से बहार रहकर, औपचारिकता में जीवन बीत जाएगा ।

हार-जीत

हार-जीत, पास-फेल, सुख-दुःख क्यों होता है ? क्योंकि वर्तमान में हमारा दर्शन खंडित होता है । हमारी सूक्ष्म गलतियों को समझकर दूर करेंगे तो पहचान सकेंगे । अखंड बहते जीवन में हकीकत में हार या जीत जैसा कुछ होता ही नहीं ।

सलामती

समझ ही सलामती । इसके सिवा यह जगत में शांति या सलामती जैसा कुछ भी नहीं । हमारे अंदर अगर शांति होगी तो बहार भी शांति का अनुभव होगा । शांति और सलामती की खोज बाहर करेंगे तो उसका अंत आएगा नहीं, पूरा जीवन खर्च हो जाएगा ।

तर्क वितर्क

ताला महत्व का है कि चाबी ? ऐसे हास्यस्पद तर्क वितर्क में जीवन बीत जाता है । हकीकत में दोनो जुडे हुए हैं । ताले बिना चाबी का कोई महत्व नहीं तो चाबी बिना ताले का कोई महत्व हो सकता है ? ताला और चाबी एक दूसरे के पूरक हैं वह बात तर्क वितर्क से […]

लाभ-नुकसान

जीवन के संदर्भ में जहाँ तक गणित मतलब उलझन । गणित का योग्य महत्व है परंतु हम उसके साथ एकरूप और आसक्त हो जाते हैं और अहम का खेल शुरु हो जाता है । बाद में लाभ और नुकसान के गणित में उलछन न हो तभी नई बात नहीं ।

संशोधन

जीवन जीते जीते ही संशोधन होता रहता है । यह संशोधन आसक्त हुए बिना हो तो जीवन की खूबियाँ और रहस्य हमारी समझ में खुलते हैं । संशोधन का अंत आए तो जीवन कहाँ जड बन जाए या खंडित हो जाए ।

जाहिर में आना

(खुल्ले) जाहिर में आना मतलब अपने अहम का विस्तार करना । जाहिर में आने का प्रयत्न करने से आंतरिक तौर पर पीछे पड जाते हैं तथा छोटे भी बन जाते हैं । यह बात विवेकपूर्ण देखने से अपने में सहजता, सरलता आएगी ।

मजा-पीडा

मजा-पीडा आने का कारण क्या ? कारण यह कि हम कर्ता-भोक्ता बनते हैं । मजा और पीड से ऊपर उठे तो सहज आनंद का अनुभव होगा । यह सहज आनंद शाश्वत है । नींद में से जागे और विवेक जागृत करे तो सहज आनंद अनायास अनुभव कर सकेंगे ।