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शोषण

स्वज्ञान के बिना जो कुछ भी करेंगे वह वास्तविक तौर पर हिंसा और शोषण को बढावा देगा । जैसे किसी का शोषण करना गलत है वैसे ही अपना शोषण करने देना भ अयोग्य है । आज समग्र जगत शोषण की तरफ झुक रहा है तभी अलिप्त और शोषण रहित कैसे जीए वह सीखें ।

प्रयत्न

गलत प्रयत्न करने से हमारे जीवन में स्थिरता, समता नहीं आती । उसका कारण यह है कि हमारा खुद का स्वभाव स्थिरता नहीं चाहता । स्वरुप की अनुभूति में मानसिक प्रयत्न अवरोध रुप ही बनते हैं ।

आचरण

हम चाहे जितने बडे विद्धवान हों परंतु जीवन में आचरण नहीं हो तो प्रश्न और फरियादें रहेंगी ही । वर्तमान में समग्र भाव से देखें और सुने तो योग्य आचरण स्वयं होता रहेगा । हकीकत में आचरण स्वज्ञान से अमल में लाया जाता है ।

प्रश्न

प्रश्न से गुजरे बिना कभी प्रश्न का अंत आता नहीं । परंतु हम प्रश्न के साथ राग या द्वेष करते है इसलिए उसका हल कभी आता नहीं । रागद्वेष के बिना शांत । चित्त से प्रस्न से गुजर जाना सीख लें ।

ज्ञात विसर्जन

सत्य हंमेशा निरपेक्ष होता है । पूरा जीवन हम ज्ञात में ही जीते हैं । उसके कारण विभाजन (भाग) पडने के और बुद्धि के तर्क की चर्चाएं चलती रहेंगे । जीवन व्याख्याओं में ही खोया रहेगा । ज्ञात और अज्ञात जिस पर जीवन है इसका अनुभव करेंगे तभ जीवन के सौंदर्य को पा सकेंगे ।

पूर्वग्रह

यह जगत में किसी से भी अलग रहा जाए ऐसा नहीं है, परंतु पूर्वग्रह के लिए हम अलग हो जाते हैं । यह हमारे अज्ञान और अविवेक है । अपने खुद के साथ एक रूप होना होगा तो पूर्वग्रह से मुक्त रहना सीख लेना पडेगा ।

स्वज्ञान का अभाव वही अज्ञान

इनसान अगर जीवन की वास्तविकता और प्रश्नों से भागे नहीं तो और उसके साथ रहे तो स्वज्ञान हो । स्वज्ञान का अभाव यही बडा अज्ञान है । माहिती ज्ञान पंडिताई या बुद्धिचातुर्य चाहे जितना हो तब भ जीवन में काम आता नहीं, उलटा जीवन से दूर खिंच ले जाता है । स्वज्ञान जीवन में से […]

आधार का अंत, जीवन का आरंभ

मानसिक रूप से आधारो का अंत आते ही जीवन का आरंभ होता है और आंतरिक मुक्ति की तरफ अपनी गति होती है । यह अपने हाथ की ही बात है । हमको सच्ची भूख और व्याकुलता है तो मानसिक तौर पर सब आधारो के बिना, स्वतंत्र मुक्त जीवन जी सकते हैं । आलसीपना हमारा सबसे […]

हम मुक्त ही हैं ।

हम मुक्त ही हैं परंतु मानिसक तौर पर बेचैनी भरे प्रयत्न करने से मुक्त अवस्था को अनुभव को दूर करते हैं । पूरे जीवन के दौरान, मुक्ति कैसी सौम्य, शांत और परम आनंदपूर्ण है यह भीतर से अनुभव कर नहीं सकते । मुक्त होने के लिए जितने ज्यादा प्रयास करते हैं उतना ही मुक्त स्वरुप […]