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त्याग

त्याग करना पडे वह त्याग नहीं है । त्याग सहज रूप से हो जाता है । दूसरों की मदद या सहयोग करते समय उसका ख्याल हंमेशा रहे तो अलग हो जाएंगे । क्योंकि आंतरिक रुप से सहायता करनेवाला महत्व का रहता है । यह बात को समग्र भाव से देखेंगे तो त्याग का मूल प्रेम […]

आंतरिक क्रांति

आंतरिक क्रांति हुए बिना अखंड तरफ यात्रा की शुरुआत होती नहीं । हम ज्यादातर परंपरावशः बनकर गोलगोल चक्र में घूमते रहते हैं । हमारी उत्सुकता हो तो आंतरिक क्रांति क्षण में ही हो ।

ईश्वर का साक्षात्कार

आत्मा ही परमात्मा, ईश्वर की खोज बहार चलती है वहाँ तक प्रयत्न, प्रश्न और निष्फलता (विफलता) का लगाव रहेगा । आत्मा और परमात्मा एक ही है अविभाजित है । निरंतर प्रेम और करुणा बहे वही ईश्वर का साक्षात्कार ।

गुरु

जो स्थिरता और सहजता में जीता है वह किसी को गुरु मानता नहीं या बनाता ही नहीं । और अगर गुरु बन बैठे तो सच्चा धार्मिक नहीं । गुरु संप्रदाय रचता है और परंपरा खडी होती है । अंत में खुद गुरु और शिष्य  भी परस्पर बंधन में पडते हैं ।