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सत्य की यात्रा

सत्य की यात्रा हर एक को व्यक्तिगत करनी होती है । अपने खुद के सुख शांति के लिए, अपने ही लाभ और कल्याण के लिए जीवन में से और जीवन के अटपट व्यवहारों से प्रमाणिक तरीके से गुजरना है ।

समझकर मौन रहना यह विवेक है और विवेक से पूर्ण जीवन सहज रुप से गुजरता है ।

कोई अपने साथ आए या न आए, हमे निरंतर सत्य की यात्रा के मार्ग पर स्थिर कदमो से चलकर यात्रा पूरी करनी है । यह सच्ची सेवा है ।

अगर हम योग्य तरीके से प्रमाणिकता से जीवन में से गुजरेंगे तो यात्रा स्वयं पूर्ण होगी और यही हमारा हेतू है ।

किसी के कहने से यात्रा का आरंभ होता नहीं । पुरुषार्थ हमको खुद को अकेले ही करना है ।

सत्य में जीने से अपने अंदर शक्ति, स्फुर्ति स्वयं आएगी । यह सत्य की यात्रा का स्वयंसिद्ध अनुभव है ।

शक्ति और स्फुर्ति आने के कारण यह जगत में, संसार में औऱ कुटुंब में हमें अपने खुद के पैरो के ऊपर खडे रह सकते है और विकट और जौसी परिस्थितियों में भी टिक सकते हैं । शांति और सलामती से जी सकते हैं ।

जीवन में सत्य का दर्शन होत ही सादगी और सहजता से जीवन गुजरता है । अपने खुद के ऊपर का विश्र्वास रोज रोज बढता जाता है ।

सत्य की यात्रा वह ही जीवन का सच्चा और शिक्षण है ।

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