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ज्ञात विसर्जन

सत्य हंमेशा निरपेक्ष होता है । पूरा जीवन हम ज्ञात में ही जीते हैं । उसके कारण विभाजन (भाग) पडने के और बुद्धि के तर्क की चर्चाएं चलती रहेंगे । जीवन व्याख्याओं में ही खोया रहेगा । ज्ञात और अज्ञात जिस पर जीवन है इसका अनुभव करेंगे तभ जीवन के सौंदर्य को पा सकेंगे ।