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सुनना ही सेवा

सत्य को सुनेंगे तो हमारे अदंर संवादिता आएगी और शीतलता की अनुभूति होगी इससे सुनना सच्ची सेवा बनी रहती है । सत्य को सुनेंगे तो निर्भर भी बनेंगे । बाद में जीवन में कोई व्यकित् या किसी बात का कोई भय नहीं लगेगा । सत्य और सेवा परस्पर जुडे हुए हैं, यह समझें ।

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