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हार-जीत

हार-जीत, पास-फेल, सुख-दुःख क्यों होता है ? क्योंकि वर्तमान में हमारा दर्शन खंडित होता है । हमारी सूक्ष्म गलतियों को समझकर दूर करेंगे तो पहचान सकेंगे । अखंड बहते जीवन में हकीकत में हार या जीत जैसा कुछ होता ही नहीं ।

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