प्रमाद लापरवाही

लापरवाही सूक्ष्म है, पकड में नहीं आती । हम अपने मानसिक प्रश्नों को हंमेशा धकेलते रहते हैं और उनमें से गुजरते नहीं । प्रश्नों, फरियादों को धकेलने से दिनों दिन वे बढते जाते हैं । हमारे प्रश्नों के मूल में प्रमाद (लापरवाही) है उसको पहचाने ।

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