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आधार

हम संपूर्ण रुप से देखें और सुने तो अपने जीवन में मानसिक आधार, आशाएं, इच्छाओं का स्वयं अंत आता है और मुक्ति की अनुभूति होती है । हकीकत में हम सदा अखंड ही है परंतु खंडित जीवन जीने के आदि हो गए हैं, इसलिए आधार ढूँढते है ।

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