पैसों का पागलपना

पैसों को जरा सा ज्यादा महत्व दे तो पत्नी-बालक और सगेसंबंधीओं से अलग पड जाते है और जीवन से तो जरूर अलग हो जाते हैं । पैसे होने के बावजूद खालीपन, अकेलापन लगता है उसकी जड में पैसों की चाहत और पैसों की पूजा करने की हद से पैसों की उतसुकता है । पैसे सर्वस्व नहीं यह समझ लें ।

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