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प्रेम

प्रेम का नाम है देना, हंमेशा देना, सब कुछ देना । प्रेम में लेना होता ही नहीं और दो मतलब मिलेगा ही । यह कुदरती नियम है । प्रेम हंमेशा पूरक ही होता है । प्रेम की शाखा मतलब करुणा । अपार करुणा । प्रेम मतलब पारसमणि । देने से बढता ही जाता है ।

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