वर्तमान

वर्तमान में हम दूसरों को सुनते नहीं, इसलिए हमारे में सहजता, सरलता, नम्रता आती नहीं । खंडित सुनने से हमारे में स्मृति का संचय होता है और फिर उसके ऊपर मंथन – चिंतन चलता रहता है । बस हमारा वर्तमान इसमें ही खर्च हो जाता है ।

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