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श्री वालजीभाई के बारे में

श्री वालजीभाई (पटेल) के आत्म निष्ठ व्यक्तित्व की समझ, उनका एक लेख पढ़ने, या उनकी अंतरंग मुलाखात से हमें आ जाएगी ।

उनकी बाते अखंड और असीम है । कभी पूरी नहीं होंगी । उनकी बातें सिधी, सरल पारदर्शक है । जिनमें थोड़ी बहुत भी चिनगारी होंगी उनके लिए वालजीभाई पारसमणि के समान साबित होंगे ।

पूर्ण सजगता के साथ वर्तमान क्षण में ही हमेशा जिनेवाले श्री वालजीभाई की वाणी, उनकी बातों में प्रेम और करुणा का स्पर्श होता है । बातें सुननेवालों को वे गदगद कर देते हैं। उनके शब्दों में सहजता और सरलता है, इसीलिए उनकी बातें छू जाती है । सुनना ये सेवा है यही श्री वालजीभाई का जीवन मंत्र है । इसीलिए सभी की बातें वे प्रेम और करुणा के साथ सुनते रहते हैं ।

अपनी रोजमर्रा की जिन्दगी जिना यही श्री वालजीभाई के लिए महत्व की बात है । क्योंकि उन्होंने खुद अपने जीवन को संपूर्ण, स्वच्छ, शुद्ध, बिना प्रपंच, निस्वार्थ और कोई भी प्रकार की आशा अपेक्षा के सिवा, लोभ-मोह-माया क बगैर खड़ा किया है ।

श्री वालजीभाई में विवेक हमेशा जागृत रहता है । सुयोग्य प्रमाणबद्ध, माप-तोल के साथ जीवन का व्यवहार कैसे किया जा सकता है । यह उन्होंने सिख लिया है ।

शब्दों-विचारों या व्यक्तियों को दो महत्व देते है । फिर भी वे किसी में आसक्त नहीं होते । इसीलिए जीवन में उभरते हुए महासागर में भी वो हमारे सामने आकाशदीप (दीप-स्तम्भ) के समान निरंतर प्रकाश फैलाते रहते हैं ।

श्री वालजीभाई के प्रत्यक्ष या परोक्ष परिचय में आना यह जीवन का प्रत्यक्ष आनंद है, हर्षोल्लास है, पूण्यकर्म है ।

मित्र-बंधु
(मित्र वर्तुळ