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प्रयत्न

गलत प्रयत्न करने से हमारे जीवन में स्थिरता, समता नहीं आती । उसका कारण यह है कि हमारा खुद का स्वभाव स्थिरता नहीं चाहता । स्वरुप की अनुभूति में मानसिक प्रयत्न अवरोध रुप ही बनते हैं ।

पैसों का पागलपना

पैसों को जरा सा ज्यादा महत्व दे तो पत्नी-बालक और सगेसंबंधीओं से अलग पड जाते है और जीवन से तो जरूर अलग हो जाते हैं । पैसे होने के बावजूद खालीपन, अकेलापन लगता है उसकी जड में पैसों की चाहत और पैसों की पूजा करने की हद से पैसों की उतसुकता है । पैसे सर्वस्व […]

आधार

हम संपूर्ण रुप से देखें और सुने तो अपने जीवन में मानसिक आधार, आशाएं, इच्छाओं का स्वयं अंत आता है और मुक्ति की अनुभूति होती है । हकीकत में हम सदा अखंड ही है परंतु खंडित जीवन जीने के आदि हो गए हैं, इसलिए आधार ढूँढते है ।

प्रमाद लापरवाही

लापरवाही सूक्ष्म है, पकड में नहीं आती । हम अपने मानसिक प्रश्नों को हंमेशा धकेलते रहते हैं और उनमें से गुजरते नहीं । प्रश्नों, फरियादों को धकेलने से दिनों दिन वे बढते जाते हैं । हमारे प्रश्नों के मूल में प्रमाद (लापरवाही) है उसको पहचाने ।

जीवन का सार

वर्तमान में ही रहना, वह सच्चा अध्यात्म है, ध्यान है, समझ है । यही अपने जीवन का सार है, नहीं तो सत्य को समझने की पूर्व तैयारीयाँ करते रहने से वर्तमान गलत ही खर्च होगा ।

स्वयं की सेवा

दूसरों का उद्धार और सेवा करने के लिए हम प्रयत्न करते हैं उसमें कभी सच्ची मानसिक तृप्ति मिलती नहीं । इनसान पहले खुद की सेवा करे तो स्वरुप को देख सके । नहीं तो जीवन भर दूसरों की सेवा करने के बावजूद अंदर से अति गरीब और भिखारी ही रहेगा ।

संग्रह

संग्रह वही संघर्ष । यह विवेकपूर्वक समझना है । विवेकपूर्वक देखना वह ध्यान और समग्र भाव से देखना वह आचरण । नहीं तो हंमेशा के लिए स्वरुप से बहार रहकर, औपचारिकता में जीवन बीत जाएगा ।

हार-जीत

हार-जीत, पास-फेल, सुख-दुःख क्यों होता है ? क्योंकि वर्तमान में हमारा दर्शन खंडित होता है । हमारी सूक्ष्म गलतियों को समझकर दूर करेंगे तो पहचान सकेंगे । अखंड बहते जीवन में हकीकत में हार या जीत जैसा कुछ होता ही नहीं ।

सलामती

समझ ही सलामती । इसके सिवा यह जगत में शांति या सलामती जैसा कुछ भी नहीं । हमारे अंदर अगर शांति होगी तो बहार भी शांति का अनुभव होगा । शांति और सलामती की खोज बाहर करेंगे तो उसका अंत आएगा नहीं, पूरा जीवन खर्च हो जाएगा ।

तर्क वितर्क

ताला महत्व का है कि चाबी ? ऐसे हास्यस्पद तर्क वितर्क में जीवन बीत जाता है । हकीकत में दोनो जुडे हुए हैं । ताले बिना चाबी का कोई महत्व नहीं तो चाबी बिना ताले का कोई महत्व हो सकता है ? ताला और चाबी एक दूसरे के पूरक हैं वह बात तर्क वितर्क से […]