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लाभ-नुकसान

जीवन के संदर्भ में जहाँ तक गणित मतलब उलझन । गणित का योग्य महत्व है परंतु हम उसके साथ एकरूप और आसक्त हो जाते हैं और अहम का खेल शुरु हो जाता है । बाद में लाभ और नुकसान के गणित में उलछन न हो तभी नई बात नहीं ।

संशोधन

जीवन जीते जीते ही संशोधन होता रहता है । यह संशोधन आसक्त हुए बिना हो तो जीवन की खूबियाँ और रहस्य हमारी समझ में खुलते हैं । संशोधन का अंत आए तो जीवन कहाँ जड बन जाए या खंडित हो जाए ।

जाहिर में आना

(खुल्ले) जाहिर में आना मतलब अपने अहम का विस्तार करना । जाहिर में आने का प्रयत्न करने से आंतरिक तौर पर पीछे पड जाते हैं तथा छोटे भी बन जाते हैं । यह बात विवेकपूर्ण देखने से अपने में सहजता, सरलता आएगी ।

मजा-पीडा

मजा-पीडा आने का कारण क्या ? कारण यह कि हम कर्ता-भोक्ता बनते हैं । मजा और पीड से ऊपर उठे तो सहज आनंद का अनुभव होगा । यह सहज आनंद शाश्वत है । नींद में से जागे और विवेक जागृत करे तो सहज आनंद अनायास अनुभव कर सकेंगे ।

खिलना

पूरे जीवन के दरमियान हम खिल उठे इसी लिए हमारा जन्म हुआ है । रोज सवेरे ताजे फूल के जैसे खिल उटे तो अपने जीवन में सौंदर्य और पारदर्शकता आएगी और जीवन के प्रति आदर और भक्ति भाव जागेगा ।

आबोहवा

हमारे खुद के जीवन में और व्यक्तितत्व में अपनी खुद की एक आबोहवा होती है । दूसरों का उपयोग या उपभोग करते समय हमें दूसरों की आबोहवा में जीते हैं और स्वार्थी बनकर खुद को लूटते हैं ।

मौलिकता

जीवन की परख हो उनमें सहजरुप से मौलिकता होती है जो मौलिक तरह से चिंतन कर सकता है उसको कोई बंधन आडे नहीं आता । उनकी दृष्टि खुलती है और विशाल बनती है । इसलिए भेदभाव की दीवार कभी बीच में नहीं आती । मौलिक रूप से जीने वाले में सहजरुप से शक्ति और स्फुर्ति […]

फूल

एक ध्यान बनकर हमारे भीतर बैठी कलि को हम फूल तक खिलने देते नहीं, यह हमारी मुसीबत है । कारण यह है कि समग्र जीवन बेध्यान पने और शुष्क वैचारिकता में ही खर्च कर देत हैं और इसके बावजूद सुगंध की आशा रखते हैं ।

त्याग

त्याग करना पडे वह त्याग नहीं है । त्याग सहज रूप से हो जाता है । दूसरों की मदद या सहयोग करते समय उसका ख्याल हंमेशा रहे तो अलग हो जाएंगे । क्योंकि आंतरिक रुप से सहायता करनेवाला महत्व का रहता है । यह बात को समग्र भाव से देखेंगे तो त्याग का मूल प्रेम […]

आंतरिक क्रांति

आंतरिक क्रांति हुए बिना अखंड तरफ यात्रा की शुरुआत होती नहीं । हम ज्यादातर परंपरावशः बनकर गोलगोल चक्र में घूमते रहते हैं । हमारी उत्सुकता हो तो आंतरिक क्रांति क्षण में ही हो ।