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अंतरसूझ का अभाव

अपने संतोषके खातिर दूसरों का दोष निकालने से प्रश्न तथा फरियादें अपने जीवन में ज्यादा आती है । अंतरसूझ के अभाव में एक दूसरे के ऊपर सारा जीवन दरमियान निकालते रहते और सत्य तथा परमशांति से सदा वंचित रहते हैं ।