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Tag Archives: अहम

लाभ-नुकसान

जीवन के संदर्भ में जहाँ तक गणित मतलब उलझन । गणित का योग्य महत्व है परंतु हम उसके साथ एकरूप और आसक्त हो जाते हैं और अहम का खेल शुरु हो जाता है । बाद में लाभ और नुकसान के गणित में उलछन न हो तभी नई बात नहीं ।

जाहिर में आना

(खुल्ले) जाहिर में आना मतलब अपने अहम का विस्तार करना । जाहिर में आने का प्रयत्न करने से आंतरिक तौर पर पीछे पड जाते हैं तथा छोटे भी बन जाते हैं । यह बात विवेकपूर्ण देखने से अपने में सहजता, सरलता आएगी ।

अहम का खेल

हमारा “मैं” हंमेशा दूसरो के प्रभाव के नीचे जीता है इसलिए मैं को पोषण मिलता है और हमको सुखदुःख व भय के अनुभव होते रहते हैं । हकीकत में यह सब हमारे मन के अर्थात “मैं” का खेल है । नींद से जागे और आसक्त न हो तो सुख या दुःख जैसा कुछ होता ही […]

अहम का विस्फोट

हमारे जीवन में पहले “मैं” का – अहम का विस्फोट होने के बाद ही जीवन का आरंभ होता है। बीज का विसर्जन होने के बाद ही वह बूटा बनकर वृक्ष के रूप से फैलता है औऱ उस पर फूल-फल स्वयं आते हैं । यह कुदरत का न बदलने वाला, अदभुत नियम है । हम भी […]

संगीतमय अखंड जीवन

हम व्याख्यान, भाषण कथाएं सब खंडित तरीके से सुनने में पूरा जीवन खर्च कर देते हैं । हम इस विषय में मनन-चिंतन करके खुद के भीतर का मार्ग ढूँढते नहीं इसलिए जीवन इसी के राग द्वेष और बोरियत के मार्ग पर चलता है । खंडितका अर्थ है सीमित दृष्टि, ऊपरी दृष्टि । जीवन और संसार […]