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मजा-पीडा

मजा-पीडा आने का कारण क्या ? कारण यह कि हम कर्ता-भोक्ता बनते हैं । मजा और पीड से ऊपर उठे तो सहज आनंद का अनुभव होगा । यह सहज आनंद शाश्वत है । नींद में से जागे और विवेक जागृत करे तो सहज आनंद अनायास अनुभव कर सकेंगे ।

कर्ता भोक्ता

हम कर्ता भोक्ता रहते है इसलिए पूरा जीवन खंडो में व्यतीत होता है । सचमुच तो जीवन अखंड है परंतु हम उसे खंडो में बाँटे बिना जी नहीं सकते, इसलिए मानसिक शांति या आनंद अनुभव नहीं कर सकते । समग्र-अखंड दर्शन करेंगे तो यह बात समझ में आएगी ।

निज आनंद

निज आनंद जैसा आनंद एक भी नहीं है । परंतु हम खुद जीवन में प्रश्न खडे करके निज आनंद को भीतर प्रकट होने से रोकते हैं । बाद में पूरा जीवन प्रश्नों की परंपरा में आनंद के अभाव में बीत जाता है । यह बात हृदय से समझनी चाहिए ।

सच्ची मुक्ति

हम अगर जागते हो तो अपना स्वभाव स्वरुप हलकेफूल जैसा बना रहता है और जीवन में सौंदर्य के साथ आनंद खिल उठता है । यही सच्ची मुक्ति है, स्वतंत्रता है और इसमें ही हमारा गौरव है ।