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Tag Archives: कर्ता-भोक्ता

मजा-पीडा

मजा-पीडा आने का कारण क्या ? कारण यह कि हम कर्ता-भोक्ता बनते हैं । मजा और पीड से ऊपर उठे तो सहज आनंद का अनुभव होगा । यह सहज आनंद शाश्वत है । नींद में से जागे और विवेक जागृत करे तो सहज आनंद अनायास अनुभव कर सकेंगे ।

कर्ता भोक्ता

हम कर्ता भोक्ता रहते है इसलिए पूरा जीवन खंडो में व्यतीत होता है । सचमुच तो जीवन अखंड है परंतु हम उसे खंडो में बाँटे बिना जी नहीं सकते, इसलिए मानसिक शांति या आनंद अनुभव नहीं कर सकते । समग्र-अखंड दर्शन करेंगे तो यह बात समझ में आएगी ।

धीरज

कहावत एक दम सच है कि धीरज (सर्ब) का फल मीठा । कर्ता भोक्ता बनने से कच्चा ही कट जाता है और उसमें कुदरती मीठाश आती नहीं । हमें हर एक बात में जल्दबाजी और बेसबरी हो जाती है इसलिए कडवापन, ईर्ष्या, क्रोध, लोभ इत्यादि दिनो दिन बढता जाता है । धीरज में मानसिक समय […]

कर्ता-भोक्ता न बने

हमारे पास धन हो ज्ञान हो परंतु उसके कर्ता-भोक्ता न बने तो अपने जीवन में सहजता और स्वभाविकता आए और फिर अपने खुद के साथ सच्चा संबंध होता है । संबंध मतलब एकता । कर्ता-भोक्ता बनने से हम अज्ञान वशः एक दूसरे को दुःखी करते हैं | एक दूसरे का जाने अनजाने में शोषण होता है । […]