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Tag Archives: चिंतन

वर्तमान

वर्तमान में हम दूसरों को सुनते नहीं, इसलिए हमारे में सहजता, सरलता, नम्रता आती नहीं । खंडित सुनने से हमारे में स्मृति का संचय होता है और फिर उसके ऊपर मंथन – चिंतन चलता रहता है । बस हमारा वर्तमान इसमें ही खर्च हो जाता है ।

मौलिकता

जीवन की परख हो उनमें सहजरुप से मौलिकता होती है जो मौलिक तरह से चिंतन कर सकता है उसको कोई बंधन आडे नहीं आता । उनकी दृष्टि खुलती है और विशाल बनती है । इसलिए भेदभाव की दीवार कभी बीच में नहीं आती । मौलिक रूप से जीने वाले में सहजरुप से शक्ति और स्फुर्ति […]