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मौलिकता

जीवन की परख हो उनमें सहजरुप से मौलिकता होती है जो मौलिक तरह से चिंतन कर सकता है उसको कोई बंधन आडे नहीं आता । उनकी दृष्टि खुलती है और विशाल बनती है । इसलिए भेदभाव की दीवार कभी बीच में नहीं आती । मौलिक रूप से जीने वाले में सहजरुप से शक्ति और स्फुर्ति […]

अनुकरण

जीवन में ज्यादातर हम दूसरों का अनुकरण (नकल) करते होते हैं । हमारे पास इतनी सामान्य समझ भी नहीं है कि अनुकरण से जडता आती है । अनुकरण से अपनी मौलिकता और संवेदनशीलता मृतः प्राय बनती है ।