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मंथन

जीवन के अंत तक विचार मंथन क्यों चलता रहता है यह हमने कभी शांत चित्त से विचार नहीं करते । समझपूर्वक का और हृदयपूर्वक का संबंध हम दूसरों के साथ जोड सके तो एकता की अनुभूति होगी और मंथन के चक्र में से बाहर आ जाएंगे ।

विचार

स्थिर और शांत बनकर दूसरों की बात सुनेंगे तो विचार शांति में ही समा जाएंगे । जैसे दरिया में लहरे उठकर समा जाती हैं ऐसा विचारों का भी है । हम तो जीवन ही विचारों में व्यतीत करते हैं मतलब विचार हमको जकडकर पराधीन बनाते हैं । गहरे उतरकर इतना ही विचार करें ।

विचारक और विचार

विचारक और विचार एक हो जाए तो समय पिघल जाए । हकीकत में समय चित्तलक्षी है, मतलब कि हमारे मन की खडी की गई भ्रमणा है । समय के ऊपर आधार रखने से अपने जीवन में सुखशांति नहीं आती । हम या तो भूत काल के सुख दुःख को चिपके रहते हैं अथवा भविष्य के […]