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समग्रता

समग्रता में जीना यही अपने जीवन का सार है । वही सच्चा ध्यान है, सच्चा शिक्षण है, सच्ची सेवा है, सच्ची आंतरिक यात्रा है । यह यात्रा पूरा जीवन चलती रहती है और परिणाम वशः हमारे में शक्ति, स्फुर्ति आती रहती है ।

सजगता

सजग रहने का अगर हंमेशा ख्याल रखना पडता हो जीवन जीने में अवरोधरुप बनता है । पल पल मरना और जीना आ जाए तो जाग्रत ही रहे । हमारे में सहज रुप से शक्ति, विश्वास और मुक्ति भीतर से प्रकट होती है ।

मौलिकता

जीवन की परख हो उनमें सहजरुप से मौलिकता होती है जो मौलिक तरह से चिंतन कर सकता है उसको कोई बंधन आडे नहीं आता । उनकी दृष्टि खुलती है और विशाल बनती है । इसलिए भेदभाव की दीवार कभी बीच में नहीं आती । मौलिक रूप से जीने वाले में सहजरुप से शक्ति और स्फुर्ति […]