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समझ

किसी भी व्यक्ति का हमे चित्तलक्षी दृष्टि से उपयोग करना नहीं या करने देना नहीं । किसी से प्रभावित होना नही अथवा करना भी नहीं । यह समझ जागते होंगे तो आएगी औऱ जीवन में स्थिरता भी साथ में आएगी ।

जीवन का सार

वर्तमान में ही रहना, वह सच्चा अध्यात्म है, ध्यान है, समझ है । यही अपने जीवन का सार है, नहीं तो सत्य को समझने की पूर्व तैयारीयाँ करते रहने से वर्तमान गलत ही खर्च होगा ।

सलामती

समझ ही सलामती । इसके सिवा यह जगत में शांति या सलामती जैसा कुछ भी नहीं । हमारे अंदर अगर शांति होगी तो बहार भी शांति का अनुभव होगा । शांति और सलामती की खोज बाहर करेंगे तो उसका अंत आएगा नहीं, पूरा जीवन खर्च हो जाएगा ।