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Tag Archives: सुख

अहम का खेल

हमारा “मैं” हंमेशा दूसरो के प्रभाव के नीचे जीता है इसलिए मैं को पोषण मिलता है और हमको सुखदुःख व भय के अनुभव होते रहते हैं । हकीकत में यह सब हमारे मन के अर्थात “मैं” का खेल है । नींद से जागे और आसक्त न हो तो सुख या दुःख जैसा कुछ होता ही […]

सत्य की यात्रा

सत्य की यात्रा हर एक को व्यक्तिगत करनी होती है । अपने खुद के सुख शांति के लिए, अपने ही लाभ और कल्याण के लिए जीवन में से और जीवन के अटपट व्यवहारों से प्रमाणिक तरीके से गुजरना है । समझकर मौन रहना यह विवेक है और विवेक से पूर्ण जीवन सहज रुप से गुजरता […]