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मौन

हंमेशा सत्य बोलने से विचारों का व्यर्थ प्रयत्नों का अंत आता है और जीवन में मौन की अनुभूति होती है, परिणाम स्वरुप जीवन में शांति प्रवेश करती है । हकीकत में मौन और शांति वह अपना सहज स्वभाव है स्वरुप है ।

द्वंद्व

द्वंद्वों से पर गए बिना कभी स्वज्ञान होगा नहीं । अवगुणों को विरोधाभासी वृत्तियों को पोषण नहीं मिलने से धीरे धीरे वातावरण योग्य और स्थिर बनता जाता है । ऐसा अनुभव स्वरुप में रहने से होता है । भीतर में शांति और खामोशी भी जन्म लेती है ।